**कोई नशा क्यों करता है?नशा करना अच्छा है बुरा**
आज मैं उस मुद्दे पर लिखने जा रहा हूं जो कि आजकल की युवा पीढ़ी के लिए जानना बहुत जरूरी है हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के युवा इसका शिकार हैं आज हम ये जानेंगे कि कोई नशा क्यों करता है?और नशे का लत क्यों पड़ जाता है?
आज का इंसान जो जीवन जी रहा है इसमें प्रतिस्पर्धा (आगे निकलने की दौड़) बहुत ज्यादा है हर कोई अमीर,सफल होना चाहता है इसके लिए वह अपने तरीके से दिन रात मेहनत करता है जो नहीं करता है वो भी प्लानिंग में लगा रहता है अब थोड़ा इस बात पर चर्चा करेंगे कि कोई इंसान अमीर या कामयाब क्यों होना चाहता है?तो इसका कारण है कि हर इंसान को लगता है कि ये हो जाएगा तो जीवन में मौज हो जाएगा,सुखमय हो जाएगा। जबकि सच्चाई ये है कि सुविधाएं हों जाने से सुख मिलना ये कोई जरूरी नहीं है क्योंकि हमें जो भी भौतिक चीजें सुख महसूस करवा सकती हैं वो सिर्फ कुछ क्षण मेरा मतलब है कि कुछ महीनों तक अच्छी लगती हैं उसके बाद तो या तो बोझ बन जाती है या फिर मन उससे बेहतर किसी चीज को पाने में लालायित हो जाता है और इस तरह जिंदगी फिर उसमें उलझ जाती है।जब इंसान अत्यधिक प्रयास करने के बाद अपने सपनों की चीजें नहीं पाता है तो उसके दिमाग में ठेस पहुंचती है उसे आघात लगता है बस इसी को भुलाने या बचने के लिए वह नशे का सहारा लेता है।नशा हमारे शरीर में पहुंचने के बाद डोपामिन हार्मोन स्त्रावित करता है इससे नकली खुशी महसूस होती है वो प्रसन्नता जो कि उस सपने की चीज को हासिल करने के बाद प्राप्त होती है वही खुशी नशा करने के बाद क्षण भर प्राप्त होती है।
यही खुशी महसूस कराने वाला हार्मोन एक्सरसाइज करने के बाद,दौड़ने के बाद,सेक्स,योगा,ध्यान के बाद स्रावित होता है जो कि गुडफील कराता है।नशा करने वाले के साथ ये होता है कि जब एकबार सिगरेट या शराब से मिलने लगता है तो धीरे धीरे उतने डोज से नशे का फर्क नहीं पड़ता है अब और ज्यादा नशा करने के बाद ही असर होता है क्योंकि शरीर जब एक ही आनंद बार बार महसूस कर लेता है तो उसे नये आनंद की तलाश होती है ऐसा मानवीय प्रवृत्ति है।
नशा करने वाला व्यक्ति इस दुनिया की हकीकत या कहें तो अपने ऊपर पड़ने वाली जिम्मेदारियों को भुला कर जीना चाहता है इस वजह से नशा करता है अपने जीवन में आने वाली समस्याओं को अनदेखा करके जीने का तरीका नशे से संभव हो जाता है,नशे में जीना मतलब बेहोशी में जीना।इसी बेहोशी में इंसान खुद को भूल जाता है इसीलिए नशा करता है।
अब आते हैं कि आखिर नशा करने का नुक़सान क्या है? मैं उस नुक़सान के बारे में नहीं बताऊंगा जो कि सबको मालूम है कि नशे से फेफड़ा खराब हो जाता है,श्वास की बीमारी हो जाती है। शराब पीने से लीवर,किडनी बुरी तरह से प्रभावित होता है कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है यहां तक कि लगातार शराब पीने या नशा करने से दिमागी क्षमता भी कमजोर हो जाती है।ये ऐसे नुकसान हैं जिनसे सभी परिचित हैं, किन्तु यदि इसके बारे में शराबी से बताया जाय तो वो यही कहेगा कि मुझे पता है तुम अपना ज्ञान अपने पास रखो।या फिर कहेगा कि मुझे ज्यादा जीना ही नहीं है मैं 40 साल ही जीना चाहता हूं इसलिए नशा करता हूं, क्या करूंगा सौ साल पहाड़ जैसी जिंदगी जीकर अरे चार दिन ही जियूंगा ऐश से जियूंगा।ये तो रही सांसारिक बातें जिनसे सभी वाकिफ हैं।
अब दूसरी तरफ आते हैं कि नशे से और कौन सा नुकसान हैं जो कि मुझे लगता है कि बहुत बड़ा नुक्सान है यदि कोई इंसान लगातार नशे में ही डूबा रहेगा तो वह अपने इस असल जिंदगी के रस से विमुख हो जायेगा,यह विराट जीवन शराब, सिगरेट, तम्बाकू,गांजा जैसे तुच्छ नशे के लिए नहीं है जो रात में चढ़े और कुछ घंटों में ही उतर जाय। अरे नशा ही करना है तो ऐसा किया जाय जो पूरी जिंदगी न उतरे,सारा जीवन ही नशा बन जाय।ये नशा बुद्ध को हुआ तो उन्होंने सारी जिंदगी लोगों को और समाज को न्योछावर कर दिया।माइकल जैक्सन को हुआ तो विश्व का सबसे मशहूर डांसर बन गया, रवीन्द्र नाथ टैगोर को हुआ तो साहित्य में खुद को खपा दिये और नोबल प्राइज हासिल कर लिये,अल्बर्ट आइंस्टीन को हुआ तो दुनिया के सबसे बुद्धिमान इंसान बन गये, स्टीफेन हाकिंग को नशा हुआ तो मौत को भी पचास साल टाल दिये और आइंस्टीन के बाद सबसे मशहूर वैज्ञानिक बने ऐसे हजारों उदाहरण इतिहास में भरे पड़े हैं।
बस जरूरत इतनी है कि हर इंसान को खुद का जुनून पहचानना है और लग जाना है तन,मन धन से फिर ये पूरी जिंदगी नशा बन जाती है वक्त का पता ही नहीं चलता है कब गुजर गया, इंसान खुद को अपने काम में खो देता है यही तरीका है कि जिंदगी बोझ नहीं बनती है और मरने पर अफसोस नहीं होता है।
ये मेरे अपने अनुभवों से प्राप्त विचार हैं जो कि शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया हूं,आप सहमत या असहमत दोनों हो सकते हैं; हालांकि मैंने अपने 22 साल के जीवनकाल में कभी नशा नहीं किया,पहले तो इसकी वजह घर के संस्कार और परवरिश को जाता है पर परन्तु अब मेरी अन्तरात्मा से आवाज आती है कि नशे से दूर रहना है यदि नहीं रहा तो जिंदगी के नशे से दूर हो जाऊंगा, और हां ज्ञानी लोग ये न बताएं कि मैंने पिया नहीं तो क्या जिया। अरे भाई हीरे जैसा जीवन मिला है इसे सिगरेट, शराब जैसी तुच्छ चीज से बर्बाद करने के लिए नहीं मिला है।लोग खुश रहने के लिए वजह खोजते हैं इसीलिए दुखी हैं।
पढ़ने के लिए धन्यवाद,
सौरभ
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